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मन हुआ लिखूं, कुछ नया ! खोज दोहों पर आकर रुक गई। अपने में संपूर्ण अर्थ और व्याख्या लपेटे दो लाइनें ! कहीं बीच में घुसने की गुंजाइश नहीं। उनके पॄथक व्यक्तित्व, आचरण और प्रतिष्ठित मापदंडों के कारण उन्हें माला के रूप पिरोना और भी कठिन !
परीक्षा के रूप में लिया मैंने इसे !
चुनौती थी : संवाद के धागे में गांठ भी न पड़े, माला भी अपनी सहजता न खोए और रुचि इतनी रहे कि जो पढ़े, पढ़ता ही रह जाय।
अब मुहर आपकी !

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मन हुआ लिखूं, कुछ नया ! खोज दोहों पर आकर रुक गई। अपने में संपूर्ण अर्थ और व्याख्या लपेटे दो लाइनें ! कहीं बीच में घुसने की गुंजाइश नहीं। उनके पॄथक व्यक्तित्व, आचरण और प्रतिष्ठित मापदंडों के कारण उन्हें माला के रूप पिरोना और भी कठिन !
परीक्षा के रूप में लिया मैंने इसे !
चुनौती थी : संवाद के धागे में गांठ भी न पड़े, माला भी अपनी सहजता न खोए और रुचि इतनी रहे कि जो पढ़े, पढ़ता ही रह जाय।
अब मुहर आपकी !

अपने बारे में
पत्रकार के रूप में हजार से ऊपर विशेष खबरें, स्कूप, लेख, टिप्पणी, संसद समीक्षा, संवाद और आलोचना, समालोचना; समस्याओं की, राजनीतिज्ञों की और अपनी भी।

पक्षपात हुआ, तो लाठी उठा ली।अपने संस्थान हिंदुस्तान टाइम्स वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के रूप में। दायरा बढ़ा, पत्रकारों के प्रतिष्ठित संगठन दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट का नेतृत्व और फिर दिल्ली के सभी पत्रकार कर्मचारियों की संस्था डी एस एन ई एफ का प्रतिनिधित्व !
जावेद फरीदी जैसे जुझारू का साथ। लड़ाइयां लड़ीं, हारे भी, जीते भी ! इतिहास भी रचा, कई बार !
वर्तमान में, फेसबुक पर बस यूं ही : आनंद प्रकाश शीर्षक से पेज ! सौ से अधिक पोस्ट। सिलसिला है, चल रहा है जिंदगी के प्रवाह के रूप में।
अब लड़ाई उम्र से है, जिसे मैंने बौना कर अपनी दासी के रूप में बंधक बना रखा है। देखते हैं, कितने दिन …
पांच तत्व का पिंजरा, पंछी को नहीं भाय।
जाने कब तक साथ दे, जाने कब उड़ जाय।।

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