Category Archives: Poems

कभी चले थे घर से — लेखिका प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता

कभी चले थे घर से, आँखों में लेके सपने।
पीछे छूटे थे, ना जाने मेरे कितने अपने।
कई बार आँखों में भर, यादो के आँसू, हमने खुदका हाथ थामा था।
हमारे इस बदलते रूप का कारण, बन बैठा ये ज़माना था।

Read more

चले गये तुम तो ! — लेखिका प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता

प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता की कविता चले गये तुम तो अपनी यादें छोड़ कर, रह गये, तुम्हारे अपने देखो, वही उसी मोड़ पर. तुम्हारे बलिदान का क़र्ज़, अब हमे चुकाना है, अपनी क्षमताओं को जगाकर, तुम्हे इंसाफ दिलाना है।    चले गये तुम तो, अपने प्राणो की बली देकर, देश सुरक्षा का संकल्प, अपने संग लेकर, अब तुम्हारे संकल्प की ज़िम्मेदारी

Read more

Mumbaikar’s plight !!

A poem by Shilpa Nadkarni A poor man walking through up and down the streets,.. Rushing up high and low to reach his workplace on time, He saves money and on roadside eats his “treats” And struggles to get back home in the evening time Struggling through the traffic, puddles and tolls… Mumbaikar’s pockets are full of holes paying big

Read more

वो कल ही की तो बात थी — लेखिका प्रेरणा

वो कल ही की तो बात थी जब माँ तू मेरे साथ थी,
डाटती धमकाती तो क्या,  तेरे साये की तो आस थी ,
आज तो रह गई मैं अकेली, मगर खुश हूँ,
 कुछ पल के लिए, तो तू मेरे साथ थी ,
वो कल ही की तो बात थी जब माँ तू मेरे साथ थी.

Read more
« Older Entries