मैं खुश हूँ — लेखिका प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता

मैं खुश हूँ क्योंकि,
आज का ये दिन तो मैं देख पाई।
सबको नहीं तो क्या, कुछ को तो खुश मैं रख पाई।

वो कल ही की तो बात थी — लेखिका प्रेरणा

वो कल ही की तो बात थी जब माँ तू मेरे साथ थी,
डाटती धमकाती तो क्या,  तेरे साये की तो आस थी ,
आज तो रह गई मैं अकेली, मगर खुश हूँ,
 कुछ पल के लिए, तो तू मेरे साथ थी ,
वो कल ही की तो बात थी जब माँ तू मेरे साथ थी.