परिंदे कब पिंजरे में हैं रहते

शैली कपिल कालरा द्वारा लिखी कविता देखा है परिंदों कोपिंजरों में कैद होते हुएआसमान को देखतेऔर रुकसत होते हुए पिंजरे तो अक्सर हम हैं बनातेउम्मीद के पर भी ….हम हैं … Read More

घरों में कमरे कमरों में घर

शैली कालरा की लिखित कविता वो जमाने थे जब घरों में कमरे सहूलियत के लिये बनते कभी हम खुद कभी चीज़ों को रख दिया करते कमरों में नहींघरों में थे हम रहते। हुआ करते … Read More

बेफिक्र सा ये वक़्त गुज़रता रहा

शूल सा चुभ रहा
तीर सा घुसा हुआ
ना दर्द का अहसास इसे
ना प्यार का आभास है
बेजान फूल सा
यहाँ वहाँ पड़ा हुआ ।