बेफिक्र सा ये वक़्त गुज़रता रहा

शूल सा चुभ रहा
तीर सा घुसा हुआ
ना दर्द का अहसास इसे
ना प्यार का आभास है
बेजान फूल सा
यहाँ वहाँ पड़ा हुआ ।