Author Archives: Prerna Mehrotra Gupta

कभी चले थे घर से — लेखिका प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता

कभी चले थे घर से, आँखों में लेके सपने।
पीछे छूटे थे, ना जाने मेरे कितने अपने।
कई बार आँखों में भर, यादो के आँसू, हमने खुदका हाथ थामा था।
हमारे इस बदलते रूप का कारण, बन बैठा ये ज़माना था।

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चले गये तुम तो ! — लेखिका प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता

प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता की कविता चले गये तुम तो अपनी यादें छोड़ कर, रह गये, तुम्हारे अपने देखो, वही उसी मोड़ पर. तुम्हारे बलिदान का क़र्ज़, अब हमे चुकाना है, अपनी क्षमताओं को जगाकर, तुम्हे इंसाफ दिलाना है।    चले गये तुम तो, अपने प्राणो की बली देकर, देश सुरक्षा का संकल्प, अपने संग लेकर, अब तुम्हारे संकल्प की ज़िम्मेदारी

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वो कल ही की तो बात थी — लेखिका प्रेरणा

वो कल ही की तो बात थी जब माँ तू मेरे साथ थी,
डाटती धमकाती तो क्या,  तेरे साये की तो आस थी ,
आज तो रह गई मैं अकेली, मगर खुश हूँ,
 कुछ पल के लिए, तो तू मेरे साथ थी ,
वो कल ही की तो बात थी जब माँ तू मेरे साथ थी.

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