छंटने वाला है कोविद-19 का अंधेरा।

प्रेरणा मेहरोत्रा द्वारा लिखित मीता कपूर की जानकारी पर आधारित। 

किसी ने खूब कहा है कि सुख के बाद दुख और दुख के बाद सुख की ये प्रतिक्रिया चलती ही रहती है। अगर हम बात करें 2020 की तो इस साल की शुरुवात से ही पूरी दुनिया कई परेशानियों  का सामना कर रही है कहीं भूकंप के झटके, कहीं तूफान, तो कहीं टिड्डियों का हमला और इस कोविद -19 महामारी ने तो जैसे जीने का पूरा ढंग ही बदल दिया।जिसके कारण बहुतो को अपने व्यवसाय में नुकसान हुआ और लोगो की जैसे उम्मीद ही ख़त्म हो गई कि न जाने अब वो पहले वाला वक़्त वापिस आयेगा भी या नहीं और सरकार ने भी अपने देश वासियों को समझाते हुये कहा कि अब हमे इसके साथ ही जीना होगा। लेकिन कहते है ना कि दुख के काले बादल कभी देर तक नहीं रहते वर्षा होकर आसमान फिर से साफ़ हो जाता है। इसी तरह इस महामारी के चलते आई है कुछ सकारात्मक खबर आइये एक नज़र अब उस पर भी डाले। 

ऑक्सफोर्ड विशेषज्ञ ने बताया हममें से अधिकांश को कोविद -19 वैक्सीन की आवश्यकता नहीं है। 

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय कि प्रोफेसर सुनीता गुप्ता, एक एपिडेमियोलॉजिस्ट, ने कोविद -19 महामारी के खिलाफ प्रतिवाद के रूप में लॉकडाउन के खिलाफ अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि हममें से अधिकांश को कोविद -19 वैक्सीन की आवश्यकता नहीं है। 

प्रोफेसर गुप्ता ने बताया कि सामान्य रूप से स्वस्थ लोग जो कि बुजुर्ग या शारीरिक रूप से कमजोर नहीं है उनमें कोई और बीमारी(comorbidities) भी नहीं है इसलिए उन लोगो के लिए यह वायरस एक सामान्य फ्लू जैसा ही है। उन्होंने कहा कि टीका, जब यह अस्तित्व में आएगा, इसका उपयोग कमजोर लोगों के समर्थन के लिए किया जाएगा, “हममें से अधिकांश को कोरोनोवायरस के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.

गुप्ता ने कहा कि उन्हें लगता है कि कोरोनावायरस महामारी स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाएगी और इन्फ्लूएंजा की तरह हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएगी।

भारत का पहला कोरोनावायरस वैक्सीन 15 अगस्त तक लॉन्च किया जा सकता है।  

नई दिल्ली: भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ साझेदारी में “कोवाक्सिन”(COVAXIN) विकसित करने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के फास्ट-ट्रैकिंग प्रयासों के साथ 15 अगस्त तक भारत में पहला मेड-इन-इंडिया कोरोनॉयरस वैक्सीन लॉन्च किया जा सकता है।

सरकार के शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान निकाय ने कहा है कि स्वदेशी COVID-19 वैक्सीन (BBV152 COVID वैक्सीन) के नैदानिक परीक्षणों के लिए एक दर्जन संस्थानों का चयन किया गया है। ICMR ने 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस तक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपयोग के लिए वैक्सीन लॉन्च करने की योजना के बारे में बात की।नैदानिक परीक्षण के लिए चुने गए संस्थान विशाखापत्तनम, रोहतक, नई दिल्ली, पटना, बेलगाम (कर्नाटक), नागपुर, गोरखपुर, कट्टनकुलथुर (तमिलनाडु), हैदराबाद, आर्य नगर, कानपुर (उत्तर प्रदेश) और गोवा हैं।

द्वितीय COVID-19 वैक्सीन चरण I, II मानव परीक्षणों के लिए भारत में मंजूरी दी गई.

नई दिल्ली: ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने अपने COVID-19 वैक्सीन के प्रथम चरण और दूसरे चरण के मानव नैदानिक परीक्षणों को शुरू करने के लिए दवा कंपनी Zydus Cadila को मंजूरी दे दी है। अनुमोदन प्राप्त करने के लिए हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के कोवाक्सिन (COVAXIN) के बाद यह दूसरा टीका है।

वैक्सीन और जेनेरिक दवाओं के अग्रणी निर्माता, भारत को इस दौड़ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है, जिसमें कई संस्थान विभिन्न दवाओं के साथ काम कर रहे हैं। वर्तमान में दुनिया भर में मनुष्यों पर कम से कम 17 टीको का परीक्षण किया जा रहा हैं।

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