कैसे विकास खन्ना ने लॉकडाउन मे लाखों ज़रूरतमंदों की मदद की…

प्रेरणा मेहरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित शाहिद की जानकारी पर आधारित।

पिछले दो महीनों से, सेलिब्रिटी शेफ विकास खन्ना न्यूयॉर्क में अपने अपार्टमेंट से भारत में राहत प्रयासों में आगे आकर मदद कर रहे है। विकास खन्ना जो वाकई में एक इंसानियत की मिसाल हैं, पिछले दो महीनों से, वह देश में कमजोर समुदायों को भोजन वितरित कर रहे है। उनके मन में इस उदारता की भावना तब जागी जब उन्हें लाखों प्रवासी श्रमिकों और दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों की तस्वीरों और ख़बरों में, उन सब की दयनीय हालत की खबर पढ़ी कि कैसे वह सब खाली पेट रहते हुये अपने गृहनगर में जा रहे है।

वह उनके साथ और अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में अनगिनत अन्य लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करना चाहते थे, जो कोविद -19 महामारी के मद्देनजर तालाबंदी के दौरान भूख से परेशान थे। इसलिए खन्ना जी ने भोजन की आवश्यकता वाले लोगों के विवरण के लिए अनुरोध करते हुए सोशल मीडिया पर एक अपील भी की और उन्होंने कुछ ही समय में बहुत सी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त की।

दिनांक 27 मई, न्यूयॉर्क टाइम्स पीस, के उल्लेख में बताया गया कि अब तक, उन्होंने डायमंड हार्बर, पश्चिम बंगाल में सैनिटरी नैपकिन के वितरण का समर्थन किया है, और उत्तर प्रदेश और बिहार में पेट्रोल पंपों के भीतर 57 फूड स्टेशन बनाए हैं, जो इस कदम पर प्रवासी श्रमिकों को पका हुआ भोजन प्रदान करते हैं। “शुक्रवार को, ईद से एक दिन पहले, रमजान के मुस्लिम पवित्र महीने के अंत में, श्री खन्ना की टीम ने मुंबई में 200,000 से अधिक लोगों के लिए दावत किट वितरित किए जिसमे चावल, दाल, आटा, फल, सब्जियां, चाय, कॉफी, मसालों, चीनी, पास्ता, तेल और सूखे फल शामिल थे।

अब खन्ना जी की यह पहल एक नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से तैयार है – 3 जून को, उन्होंने 125 से अधिक शहरों में राष्ट्रीय आपदा राहत बल और विभिन्न अन्य सहयोगियों की मदद से 9 मिलियन भोजन वितरित किए। वे कहते हैं, “9 मिलियन का खाना मेरे साथी मास्टरशेफ इंडिया के जजों और प्रोडक्शन टीम को समर्पित है।

उन्होंने बताया की 11 अप्रैल को, मैं थोड़ा निराश महसूस कर रहा था। हजारों किलो खाद्य आपूर्ति वाले ट्रक गायब हो गए थे, लोग राशन लेकर फरार हो गए थे। जब मैंने अपनी माँ को फोन किया, जो अमृतसर में है और उन्होंने मुझसे कहा, “तुम मेरे फौजी बेटा हो और मैंने तुम्हे हार मानने के लिए इतना बड़ा नहीं किया है। तुम भोजन को लोगों तक पहुँचाओ और याद रखो कि तुम किसी पर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं। “उनकी बातों ने मुझे प्रेरित किया और मुझे खुशी है कि मैं इस पहल में सफल रहा।

भोजन वितरण प्रक्रिया के हर चरण में इस तरह के अनुशासन को देखना बहुत ही आश्चर्यजनक है। लोग सभी तरह से सामाजिक भेद मानदंड का पालन करते हुए लाइनों में खड़े होते हैं, भोजन पैकेट सौंपने से पहले हाथों को साफ किया जाता है और मैं प्रत्येक चरण के कठोर प्रलेखन को बनाए रखता हूं क्योंकि यह पारदर्शिता की श्रृंखला भी बनाता है।

उन्होंने बताया कि मुंबई में, एक बच्चा बिना किसी चप्पल के भोजन के लिए राशन लेने आया। यह एक गहरी दुखद घटना थी। इसलिए, अगले दिन, हमने भोजन की आपूर्ति के साथ-साथ चप्पल भी प्रदान करने का फैसला किया। आज, मेरे पास वितरित की जाने वाली 50,000 चप्पलें हैं।

फिर, जिस क्षण हमने सुना कि लोग भोजन के बिना, ट्रेनों पर लंबी यात्रा कर रहे थे, हमने इस क्षेत्र में भी कदम रखने का फैसला किया।लेकिन वह पहले विफल रहा क्योंकि लोग भोजन पैकेट प्राप्त करने क़े लिए एक दूसरे के ऊपर चढ़ रहे थे और फिर उसके बाद हमने उत्तर प्रदेश और बिहार के छह रेलवे स्टेशनों पर भोजन उपलब्ध कराया।

अंत में बस हम यही कहना चाहेंगे कि विकास खन्ना जी का यह कृत्य अविस्मरणीय रहेगा क्योंकि उन्होंने जो ठाना वह सब करके भी दिखाया।

Leave a Reply

%d bloggers like this: