स्वदेशी-एक बार तब जीते थे, एक बार अब फिर जीतेंगे.

प्रेरणा मेहरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित।

इतिहास के पन्नो को अगर दोहराया जाये तो हम जानेंगे कि हर एक दशक में तबाही ने अपने रंग दिखाये है। ऐसे वक़्त में कुछ लोग अपने हालातों से लड़ नहीं पाये तो कुछ आगे बढ़ कर अपने देश को बचाने के लिए आये। अगर हम उन दिनों की बात करे जब भारत आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहा था तब स्वदेशी आंदोलन, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक हिस्सा था और विकासशील भारतीय राष्ट्रवाद एक आर्थिक रणनीति थी जिसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य को सत्ता से हटाना और स्वदेशी के सिद्धांतों का पालन करके भारत में आर्थिक स्थिति में सुधार करना था जिसमें कुछ सफलता भी मिली थी और भारत वासी आत्म निर्भर भी हुये थे।स्वदेशी आंदोलन आजादी तक चला और इसे काफी बल मिला था। कहा जाता है कि यह महात्मा गांधी का सबसे सफल आंदोलन था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनावायरस महामारी से उबरने के लिए मंगलवार रात 8 बजे 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का एलान किया था. इस पैकेज में पहले से जारी पैकेज (पीएम गरीब कल्याण और आरबीआई के एलान) भी शामिल है. यह आर्थिक पैकेज देश की जीडीपी का 10 फीसदी है. पीएम मोदी ने कहा कि राज्यों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर लॉकडाउन 4.0 से संबंधित जानकारी आपको 18 मई से पहले दे दी जाएगी.

परिस्थिति चाहे कितनी भी ख़राब क्यों ना हो, लेकिन जब इंसान अपने मन में उम्मीद की ज्योत जलाता है, तो उस ज्योत को साक्षी रख कर वो बड़ी से बड़ी चुनौतियों से भी लड़ कर जीत जाता है। आज कोविद-19 की महामारी से निपटने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने स्वदेशी आंदोलन फिर से अपनाने का निवेदन किया है। इस लेख के माध्यम से देखते है कि कैसे यह हमे इस महामारी से लड़ने में मदद कर सकता है।

रोजगार में वृद्धि होगी- जैसा कि हम सब जानते है कि इस महामारी के चलते काफी कंपनियों का नुकसान हुआ है खासकर वो जो आवश्यक वस्तुओं का व्यापार नहीं करती है। ऐसे वक़्त में जब बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है तब स्वदेशी आंदोलन अपने देश में बेरोज़गारो को रोज़गार दे सकता है, क्योंकि भारत आज तक काफी उत्पादों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर था.ऐसे में अगर हम खुदका उत्पादन बढ़ाये तो काफी लोगो की मदद हो सकती है, जो इस महामारी के रहते अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे है।

स्वयं स्वतंत्र-कहते है न हर बुराई में ही कुछ अच्छाई छिपी होती है, भारत के प्रधानमंत्री मोदी के इस निवेदन से भारत एक बार फिर आत्म निर्भर होगा,और अपनी क्षमताओं को पहचानेगा।मोदी जी के इस फैसले से मोदी जी के मेक इन इंडिया अभियान को एक नई दिशा मिली है, क्योंकि यह उनकी सरकार का हमेशा से एक ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है, लेकिन अभी तक इस अभियान ने अपना अपेक्षित रूप नहीं लिया है।

बेहतर वित्तीय स्थिति-स्वदेशी योजना के तहत घरेलू व निर्यात के बढ़ने से वित्तीय स्थिति में सुधार होगा।अभी के हालातो को देखते हुये, विदेशी बाजार से बहुत ज़्यादा उम्मीद की नहीं जा सकती, इसलिए इस वक़्त में मोदी जी ने आत्म निर्भर रहने के लिए निवेदन किया है। लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि हम दुनिया से अलग होकर किसी से भी लेन देन या व्यापार ना करे। बल्कि खुदको इतना सक्षम बनाये कि कम से कम अपनी ज़रूरतों के लिए हम स्वदेशी उत्पाद का उपयोग करे जिससे स्थानीय व्यापारियों की हम मदद कर सके।

हम स्वदेशी ब्रांड को पहचानेंगे-ओपिन इकॉनमी अच्छे के लिए ही होती है, लेकिन ऐसे में कही न कही हम अपने बनाये उत्पाद को नज़र अंदाज़ करते है क्योंकि हमे ये लगता है कि इम्पोर्टेड उत्पाद ही ज़्यादा अच्छा होता है और हम अपने बनाये उत्पाद को छोड़ बाहर से आने वाले उत्पादनों का उपयोग करते है। इस योजना से हमे हमारी मिट्टी की ताकत की पहचान होगी।

हमारे देश की वैश्विक मान्यता-इस महामारी के रहते हुये भी भारत ने अपनी क्षमताओं के बल पर वैश्विक प्रशंसा पाई उदाहरण के तौर पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और अन्य दवाओं के निर्यात की अनुमति देने के भारत के इस फैसले को यू एस के राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ साथ ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने भी सराहा है। पीएम मोदी को लिखे एक पत्र में, राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने अपने देश में भारत की दवा आपूर्ति की तुलना संजीवनी बूटी के रूप में की जो भगवान राम के भाई लक्ष्मण की जान बचाने के लिए भगवान हनुमान द्वारा लाई गई थी।

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