सऊदी अरब सजा के रूप में शारीरिक सज़ा बंद कर रहा है।

प्रेरणा महरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित, शाहिद की जानकारी पर आधारित।

रियाद (रॉयटर्स) – शुक्रवार को रॉयटर्स द्वारा देखे गए राज्य के शीर्ष अदालत के एक दस्तावेज के अनुसार, सऊदी अरब सजा के रूप में शारीरिक सज़ा बंद कर रहा है।

सामान्य आयोग द्वारा इस विषय पर निर्णय लेने के लिए कुछ समय लगाया और भविष्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शारीरिक सज़ा की जगह अब जेल की सजा या जुर्माना या दोनों सजाये साथ साथ दी जायेगी।

दस्तावेज़ के अनुसार, “यह निर्णय किंग सलमान के निर्देश के अनुसार और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सीधे निरक्षण में शुरू किए गए मानवाधिकार सुधारों का विस्तार है।”

सऊदी अरब में विभिन्न अपराधों को दंडित करने के लिए शारीरिक सज़ा लागू की गई थी। अभी तक सऊदी अरब में सजा के लिए व्यवस्थित कानून नहीं बना था.न्यायाधीश अपराधी को जुर्म की सजा शरिया या इस्लामी कानून के आधार पर देते थे.शरिया या इस्लामी कानून की व्याख्या हर न्यायधीश अपने हिसाब से करते थे।

मानवाधिकार समूहों ने पिछले मामलों का दस्तावेजीकरण किया है जिसमें सऊदी न्यायाधीशों ने अपराधियों को सार्वजनिक स्थानों पर नशा खोरी जैसे मामूली अपराध और उत्पीड़न आदि के लिए भी शारीरिक सजा सुनाई थी.

राज्य समर्थित मानवाधिकार आयोग (एचआरसी) के अध्यक्ष अवध अलावाद ने रायटर से कहा, “यह सुधार सऊदी अरब के मानवाधिकार के एजेंडा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और राज्य में हाल के कई सुधारों में से एक है।”

शारीरिक दंड के अन्य रूपों, जैसे कि चोरी के लिए अंग-विच्छेद और आतंकवाद या हत्या जैसे अपराधों के लिए सर काटना, ऐसी सजाओ का प्रावधान अभी भी जारी है।

मानवाधिकार वॉच पर मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका डिवीजन के उप निदेशक एडम कूगल ने कहा कि”यह एक स्वागत योग्य बदलाव है, लेकिन यह सालों पहले होना चाहिए था,” । “सऊदी अरब के रास्ते में अब कुछ भी नहीं खड़ा है जो उसकी अनुचित न्यायिक प्रणाली के परिवर्तन में बाधा बने।”

Leave a Reply

%d bloggers like this: