कोविद-19 के खिलाफ लड़ाई में दक्षिण एशिया की मदद करने के लिए भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई।

प्रेरणा महरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित.

एम्सटर्डम: कोरोनोवायरस संकट के बारे में “सशक्त” दृष्टिकोण अपनाने और 108 देशों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए भारत की प्रशंसा करते हुए, एक  यूरोपियन विशेषज्ञ समूह ने जोर देकर कहा कि नई दिल्ली द्वारा किए गए क्षेत्रीय नेतृत्व ने दक्षिण एशिया को अब तक सफलतापूर्वक महामारी से लड़ने में मदद की है।

शुक्रवार को प्रकाशित एक टिप्पणी में, यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) ने कहा कि कोविद -19 से निपटने में भारत और शेष दक्षिण एशिया द्वारा अपनाई गई समय से पहले सक्रिय रणनीति, ने कम से कम अब तक तो अच्छे परिणाम दिये है।

क्षेत्र के देशों में यात्रा प्रतिबंधों के जल्द लागू होने का प्रभावी संयोजन, बहार से आने वाले सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग और इसके बाद लक्षण दिखाने वाले या भारी प्रभावित देशों से आने वाले लोगों की संगरोध, और सख्त लॉकडाउन द्वारा वायरस का नियंत्रण सफलता पूर्वक  किया गया है.

विशेषज्ञ समूह ने बताया कि दक्षिण एशिया में कोविद -19 सकारात्मक मामलों की कुल संख्या अपेक्षाकृत कम है। यूरोप में रिपोर्ट किए गए एक मिलियन के करीब और 15 अप्रैल तक अमेरिका में लगभग 700,000 है।

EFSAS ने चीन और भारत के विभिन्न दृष्टिकोणों की तुलना इस संकट से करते हुए कहा है कि बीजिंग बुरी तरह से प्रभावित देशों को घटिया मेडिकल सप्लाई करने की कोशिश कर रहा है, जबकि नई दिल्ली की प्रतिक्रिया मानवता को दर्शाती है।इस बात पर भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई है।

EFSAS ने कहा कि “भारत ने संकट की इस घड़ी में अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण से काम लिया है और 108 देशों में 85 मिलियन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन टैबलेट और 500 मिलियन पेरासिटामोल की गोलियां प्रदान करना शुरू कर दिया है। भारत ने शुरू में इन दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन जल्द ही उस फैसले को बदल दिया गया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रतिबंध से कही ज़्यादा बड़ी मानवता है। 

कोरोनावायरस, जो पहली बार चीन में एक कुख्यात फड़ बाजार में उभरा, ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, विश्व स्तर पर संक्रमित लोगों की संख्या 2,214,861 है और मृत्यु का आंकड़ा 150,948 है।

विश्व की दो बड़ी संस्थाओ संयुक्त राष्ट्र (UN )और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कमजोर प्रतिक्रिया ने भी वायरस को अनियंत्रित रूप से बढ़ने की अनुमति दी है।

EFSAS ने कहा कि हालांकि अब तक, दक्षिण एशिया वायरस को नियंत्रित करने में सक्षम रहा है, इस क्षेत्र में किसी भी एक देश द्वारा गैर-जिम्मेदार व्यवहार पूरे दक्षिण एशिया में एक प्रभावशाली नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

“दक्षिण एशिया को आने वाले सप्ताहों और महीनों में किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहिए क्योंकि वायरस का तेजी से प्रसार के लिए अंतर्निहित स्थितियां अभी भी इस अत्यधिक आबादी वाले क्षेत्र में मौजूद हैं। यदि रोग की प्रगति को जांच के दायरे में नहीं रखा गया, तो अंतिम  परिणाम घातक होगा। दक्षिण एशिया में कोरोनोवायरस चीन, अमेरिका, इटली, स्पेन, ईरान या दुनिया में कहीं भी पाया जा सकता है।

ऐसे वक़्त में जब पूरी दुनिया इस महामारी कोविद-19 की गंभीर बीमारी से लड़ रही है.भारत ने केवल अपनी न सोच कर अपने पड़ोसी देशो की मदद करने का जो फैसला लिया है वह वाकई अविस्मरणीय रहेगा। ऐसे वक़्त में दुनिया के लिए आगे आकर भारत ने अपनी संस्कृति का मान रखा.आज हमे यह कहते हुये बेहद गर्व महसूस हो रहा है कि हम हिंदुस्तानी है। भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ कई वीर महापुरषो ने जन्म लिया है, आज उन तमाम वीरो के दिये हुए सिद्धांतो पर चल कर भारत ने कहीं न कहीं उनके दिये हुए ज्ञान को अपना कर उनका भी मान बढ़ाया है।

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