महिला कांस्टेबलों द्वारा गरीबों के लिए मुफ्त मास्क बनाये जा रहे है।

प्रेरणा महरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित,शाहिद की जानकारी पर आधारित।

नई दिल्ली -ग्रेटर कैलाश पुलिस स्टेशन में सार्वजनिक सुविधा डेस्क पर, तीन महिला कांस्टेबलों द्वारा उन लोगो के लिए मुफ्त में फेस मास्क सिला जा रहा है जो फेस मास्क खरीदने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है। पिछले सप्ताह में, इन तीन महिला कांस्टेबलों ने 200 से अधिक फेस मास्क तैयार किए हैं और उन्हें वितरित किया है।

मास्क बनाने के काम में 26 वर्षीय कांस्टेबल गुडिय़ा देवी कपड़े काटने का काम कर रही है, उनकी सहकर्मी कांस्टेबल नीलम टोप्पो मास्क की परतों की समरूपता की जांच कर रही हैं और सिलाई मशीन पर मास्क की सिलाई करना कांस्टेबल सुन्नी देवी का काम है, और वह यह काम खुशी-खुशी कर रही है क्योंकि उन्हें सिलाई का शौक है।ऐसे ये तीन महिला शक्ति साथ में मिलकर काम कर रही है। मास्क के कपड़े का रंग गुलाबी है जो महिला शक्ति का प्रतीक है।

तैयार उत्पादों को पहले पानी और सोडियम हाइपोक्लोराइट के एक सोल्युशन में भिगोया जाता है ताकि उन्हें साफ किया जा सके। फिर उन्हें वितरण से पहले धोने के बाद सूखा कर और फिर इस्त्री किया जाता है।इसका वितरण झुग्गियों में व् जरूरतमंदों को किया जाता है। उनमें से कुछ कचरा संग्रहकर्ता या स्वीपर हैं जो संक्रमित क्षेत्रों में काम करते हैं। यह उनके लिए वरदान है कि उन्हें घर का बना फेस मास्क मुफ्त में मिल रहा है, जो धोने योग्य और पुन: उपयोग किया जा सकता है।

प्रक्रिया हर दिन सुबह 9 बजे शुरू होती है और शाम 6 बजे तक समाप्त होती है। जब उनसे पूछा गया कि इस काम के लिए उन्हें कहाँ से प्रेरणा मिली, तो उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने हाल ही में पुलिस नियंत्रण कक्ष को यह बताया कि मास्क उपलब्ध नहीं हैं।गुडिय़ा ने कहा “हम चिंतित थे क्योंकि मौजूदा स्थिति में हर एक के लिए एक फेस मास्क होना ज़रूरी है,” । “मेरी दोस्त सुन्नी ने तुरंत स्टेशन हाउस ऑफिसर सोम परुथी से कहा कि उसके पास घर पर एक सिलाई मशीन है फिर SHO द्वारा मशीन को पुलिस स्टेशन में मंगवा लिया गया। ”

मास्क के लिए कपड़ा एक समस्या थी क्योंकि सभी दुकानें लॉकडाउन की वजह से बंद थीं। इसलिए स्थानीय निवासियों के कल्याण संघ से यह देखने के लिए कहा कि क्या किसी सदस्य का कपड़ा व्यवसाय है। लेकिन इससे पहले ही आरडब्ल्यूए के सदस्यों ने गुलाबी कपड़े के दो थान दान कर दिये, शुरू में फेस मास्क का इस्तेमाल पुलिस द्वारा किया गया जो सफेद कपड़े से बनाया गया था।

गुड़िया और देवी इस काम पर पूरी तरह से लगी हुई हैं, जबकि उनकी मदद करने वाला तीसरा व्यक्ति उस महिला अधिकारी पर निर्भर है जो ड्यूटी पर है। मास्क सिलाई के बीच, वे वरिष्ठ नागरिकों को कॉल करने और उनके स्वास्थ्य और जरूरतों की जांच करने का नियमित कर्तव्य भी निभाती हैं।

पुलिसकर्मी से प्रेरित होकर SHO की शिक्षक पत्नी मीनू ने भी घर पर मास्क बनाना शुरू कर दिया है। मीनू ने कहा, “जब मेरे बच्चे सो रहे होते हैं, तो मैं मास्क सिलने के लिए समय का इस्तेमाल करती हूं, हर दिन कम से कम एक दर्जन मास्क बनाकर पुलिस को वितरण के लिए सौंपने का लक्ष्य रखती हूं,।

Leave a Reply

%d bloggers like this: