शिरडी साईं बाबा आज भी हमारे समीप है।

प्रेरणा महरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित .

“दुनिया में क्या नया है? कुछ भी तो नहीं। दुनिया में क्या पुराना है? कुछ भी तो नहीं। सब कुछ हमेशा यही तो रहा है और हमेशा यही रहेगा। ” – शिरडी साईं बाबा ॐ साईं राम

शिरडी के साईं बाबा, जिन्हें शिरडी साईं बाबा के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्हें उनके भक्तों द्वारा उनके व्यक्तिगत गुणों और मान्यताओं के अनुसार एक संत, फकीर और सतगुरु के रूप में माना जाता था। वह अपने हिंदू और मुस्लिम दोनों भक्तों के प्रति श्रद्धा रखते थे. उन्होंने सच्चे सतगुरु या मुर्शिद को आत्मसमर्पण करने के महत्व पर बल दिया, जो दिव्य चेतना के मार्ग पर चल रहा है.साईं बाबा की पूजा दुनिया भर के लोग करते हैं। उन्हें नाशवान चीजों के लिए कोई प्यार नहीं था और उसकी एकमात्र चिंता स्वयं की प्राप्ति थी।उन्होंने प्यार, क्षमा, दूसरों की मदद करना, दान, संतोष, आंतरिक शांति, और भगवान और गुरु के प्रति समर्पण सिखाया।

उन्होंने धर्म या जाति के आधार पर कोई भेद भाव नहीं किया। साईं बाबा के शिक्षण में हिंदू और इस्लाम के संयुक्त तत्व हैं.जिस मस्जिद में वह रहते थे उन्होंने उसको एक हिंदू नाम- द्वारकामयी दिया।वह मुस्लिम रीति-रिवाजों का अभ्यास करते थे, दोनों परंपराओं से आकर्षित होने वाले शब्दों और आंकड़ों का उपयोग करना सिखाते थे और उनकी मृत्यु के बाद, शिरडी में उन्हें दफनाया गया था। उनके प्रसिद्ध सुलेखों में से एक, “सबका मलिक एक” (“एक ईश्वर सभी पर शासन करता है”), हिंदू , इस्लाम और सूफीवाद धर्म से वह जुड़े हुये थे। उन्होंने यह भी कहा, “मुझ पर विश्वास करो और तुम्हारी हर प्रार्थना ज़रूर स्वीकार होगी। उन्होंने हमेशा “अल्लाह मलिक” (“ईश्वर राजा है”) कहा।

आइये शिरडी साईं बाबा के कुछ अनोखे और अनमोल भावों पर एक नज़र डालते है।

  1. यदि आप धनवान हैं, तो विनम्र बनें क्योंकि फल लगने पर पौधे भी झुक जाते हैं।
  2. हर मनुष्य में परमात्मा को देखें।
  3. स्वयं और दूसरों के बीच अलगाव की एक दीवार है इस दीवार को नष्ट कर दो.
  4. हमारा कर्तव्य क्या है?ठीक से व्यवहार करना बस यही पर्याप्त है।
  5. भगवान कहीं दूर नहीं है। वह ऊपर आकाश में नहीं है, और न ही नीचे नरक में। वह हमेशा तुम्हारे पास है, तुम्हारे भीतर।
  6. किसी से लड़ाई मत करो,न कोई प्रतिशोध, न किसी की निंदा।.
  7. ईश्वर एक हैं।हिंदू और एक मुसलमान के बीच कोई फर्क नही है.मस्जिद और मंदिर भी एक ही हैं।
  8. जब तुम अपने भीतर की आंख से देखते हो। तब तुम्हे एहसास होता है कि भगवान तुम्हारे ही भीतर हैं और तुम उनसे अलग नहीं हो।
  9. भगवान की स्तुति करो और मानो तुम केवल भगवान के दास हो।
  10. उन दोस्तों को चुनें, जो अंत तक आपके साथ रहेंगे और आपका साथ निभायेंगे।

कहा जाता है कि जैसे पर्वतों में हिमालय श्रेष्ठ है वैसे ही संतों में श्रेष्ठ हैं सांई। सांई नाम के आगे ‘थे’ लगाना उचित नहीं, क्योंकि सांई आज भी हमारे बीच हैं। बस, एक बार उनकी शरण में होना जरूरी है, तब वे आपके आसपास होंगे। यह अनुभूत सत्य है क्योंकि ऐसा बाबा ने कहा है-

  • मैं अपने शरीर को छोड़ने के बाद भी सबको देखूंगा और सतर्क रहूंगा।
  • मेरी समाधि सदा मेरे भक्तों को आशीर्वाद देगी और उनकी देखभाल करेगी।
  • मैं अपनी समाधि से भी सक्रिय और चिंतित रहूंगा।
  • मेरे जीवित रहने पर विचार करें और मेरी उपस्थिति को पहचानें।
  • मैं हमेशा उन लोगों के लिए हूं, जिन्हें मेरी जरूरत है और जिन्हे मेरी शरण लेनी है।
  • अगर आप मुझे देखते हैं, तो मैं आपकी देखभाल करता हूं।
  • यदि तुमने मुझ पर अपना बोझ डाला, तो मैं इसे सहन करूंगा।
  • यदि आप मेरी मदद चाहते हैं, तो मैं सदा आपके साथ हूँ।
  • जिस घर में मैं हूं, वहां किसी को कुछ और नहीं चाहिये होगा।

3 comments

    1. Beautifully written 🙏 believing in and having faith is the biggest treasure 🙏 thank you for such a beautiful article.

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