क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है?

क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है?
कैसे गलत राह पर चल कर भी,
इंसान बेख़ौफ़ चैन की नींद सो रहा है?
जो सो रहा है, वो खो रहा है,
जागा हुआ व्यक्ति भी, ये देख रो रहा है। 

क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है?
बड़ों का बड़प्पन और छोटों का बचपन कहीं खो रहा है। 
एक दूजे को सताकर, हर कोई तो यहाँ रो रहा है। 
माया में उलझ कर, तू क्यों माया का ही हो रहा है?

क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है?
मनोरंजन के आगे इंसान अपना,
ईमान और धर्म खो रहा है। 
अपने कर्त्तव्य को भूल,
तू कैसे चैन से सो रहा है?
दुखों की बारिश में भीगा है,
क्योंकि दुखों का बीज ही,
तू अपने लिए बो रहा है। 

क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है।
अपने सुखों को तो जैसे भूल,
तू दूसरों की खुशियां देख रो रहा है।
क्यों दूसरों के सुखों से जलकर,
तू खुदसे इतना दूर हो रहा है?

2 thoughts on “क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है?

  1. दिखावे की दुनिया मैं इंसान एक दूसरे से ही दूर हो रहा है क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है

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