विदेशी अखबार देसी पत्रकार और सफ़ेद झूठ

आनंद प्रकाश द्वारा लिखित

देसी मीडिया की नकारात्मकता के विवाद को अगर एक तरफ हटा भी दें,  तो उन पत्रकारों का क्या किया जाए, जो सोने के पिंजरे में अपनी आत्मा के तोते को बंद कर  विदेशी, विशेषकर इस्लामिक देशों के, अखबारों में, अपनी तोता रट से,  ना केवल भारत विरोधी प्रचार कर रहे हैं वरन झूठ परोस कर एक विशेष वर्ग को भड़का  भी रहे हैं।

ताजा मिसाल एक बड़े नामवर पत्रकार राहुल सिंह की है, जिन्होंने एक लेख में लिखा है कि अपने हिंदुत्व  व हिंदू राष्ट्र के एजेंडे को, जिसमें मुसलमान दूसरे दर्जे के नागरिक होंगे, आगे बढ़ाने के लिए मोदी सरकार का पहला कदम…
‘The first move was to  abrogate article 370 of Indian constitution which gave Kashmir, only muslim majority state in the Indian union, special autonomus status’.
कितने भोले हैं बेचारे राहुल सिंह ! इन्हें अभी तक यह नहीं पता कि धारा 370 क्यों हटाई गई ? इन्होंने तो उसमें से हिंदू विरोधी मुस्लिम सिक्का खोज निकाला और उसे हवा में उछाल दिया। इनका काम खत्म, पैसा वसूल !

यों, इनकी सादगी काबिले तारीफ है। भाजपा के तथाकथित दूसरे कदम की व्याख्या इन्होंने यूं की….   ‘Then, even more controversially,  Citizenship Amendment Act (CAA) was passed in the Indian parliament, where the government has a big majority. It openly discriminates against Muslims’.
खूबी देखिए: इन्हें यह तो इलहाम हो गया कि CAA मुसलमानों के खिलाफ है; पर आज तक यह पता नहीं लगा पाए कि संसद में राज्यसभा भी शामिल है, जहां भाजपा अल्प मत में है । अरे,  झूठ भी बोलो, तो संभल कर ! पर,ये अपने लेख में झूठ से नहीं संभल पाए और अपनी बात में वजन डालने के लिए गांधी जी को भी खींच लाए; जबकि गांधीजी ने स्वयं, पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदुओं को, भारत में शरण देने की वकालत की थी।  

और मोदी विरोध : इस दौड़ में तो राहुल सिंह अपने नाम राशि राहुल गांधी से भी आगे निकल गए। राहुल गांधी  केवल डंडे मारने तक ही पहुंच पाए; जबकि इन्होंने  दिल्ली के चुनाव में मोदी को Goliath और केजरीवाल को David बना दिया; जिसमें Biblical Book of Samuel के अनुसार  David (kajriwal) विशालकाय Goliath (Modi) को मारकर तलवार से उसकी गर्दन अलग कर देता है ।
इस जहर भरी जलालत का आलम देखिए : चुनाव में हार जीत का फैसला वोट से नहीं, तलवार से कर रहे हैं।

कुछ तो सोचो, कितना  बिकोगे और कितना नीचे गिरोगे ? कहीं तो  विराम लगाओ, यारों ! चांदी की चमक भी समय  के थपेड़े खा कर काली पड़ जाती है,फिर आप तो…

One thought on “विदेशी अखबार देसी पत्रकार और सफ़ेद झूठ

  1. आनंद जी ने विश्लेषण में सच को कुरेदा है, विदेशी मीडिया में साल 2014 के बाद भाजपा सरकार के विरोध में लिखने वालों को ही ठेका दिया जा रहा है…

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