विश्व कैंसर दिवस: कैसे ताहिरा कश्यप ने रोग से लड़ने के लिए निचिरिन बौद्ध धर्म का उपयोग किया।

प्रेरणा महरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित.

ताहिरा कश्यप की ब्रेस्ट कैंसर के खिलाफ़ लड़ाई कई लोगों के लिए एक प्रेरणा है। लेखक और जल्द-से-जल्द निर्देशक बनने वाली ताहिरा, जो बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना की पत्नी हैं, उनका कहना हैं कि कैंसर आपको तोड़ता है और आपको डराता है, लेकिन आपको इससे डरने की और अंदर से खुदको तोड़ने की बिलकुल भी ज़रूरत नहीं है।

ताहिरा कहती हैं “मैं निचिरिन बौद्ध धर्म का अभ्यास करती हूं। इसने मुझे सिखाया है कि आपको मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए। इसका आपके भौतिक अस्तित्व पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह (कैंसर) मेरे लिए एक छोटी सी हताशा थी। लेकिन मैंने इसे सही मायने में स्वीकार किया। मैंने तय किया कि मैं इससे ख़ुशी ख़ुशी लड़ूंगी  और इसे दुनिया से नहीं छुपाऊँगी।उन्हें  पिछले साल उच्च ग्रेड घातक कोशिकाओं के साथ डीसीआईएस (डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू) का पता चला था।

ताहिरा अक्सर अपनी कैंसर की लड़ाई के बारे में उत्साही पोस्ट शेयर करती हैं, और विश्व कैंसर दिवस पर उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की थी जो उनके हौसले को बयां करती है।

जब ताहिरा कश्यप को उनके स्तन कैंसर का पता चला था, तो उन्होंने खुद से वादा किया था कि वह इस बीमारी को अपनी कमज़ोरी नहीं बनने देंगी।उन्होंने  बीमारी से जुड़ी वर्जनाओं, कलंक और मिथकों को मिटाने के लिए अपनी ओर से कुछ करने का फैसला किया।

ताहिरा ने बताया “जब मैं इस बीमारी से लड़ रही थी तब मैंने पाया कि लोगो के मन में इस बीमारी के प्रति  बहुत कुछ वर्जित ,कलंक और शर्म जुड़ी हुई है। यह एक बीमारी है और यह किसी को भी हो सकती है इसके लिए एक सही इलाज भी है तो इससे लड़ने में शर्म कैसी।

ताहिरा ने कहा कि “मैं मानती  हूँ कि कैंसर आपको डराता है लेकिन मैं इस डर को अपनी हिम्मत से बदलना चाहती थी। मैं इस समाज को आशा और विश्वास देना चाहती थी । मैं नहीं चाहती कि कैंसर को लोग नकारात्मक रूप से देखे। ताहिरा अक्सर अपने प्रशंसकों के साथ अपने संघर्ष की कहानी साझा करती हैं। उन्होंने  हाल ही में अपने मुंडा सिर की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसे उन्होंने मुक्तिबोध से सम्बोधित किया। वह कहती हैं कि यह दिखाने का उनका तरीका था कि कैंसर का पता लगाने में कुछ भी गलत नहीं है। वह महिलाओं से आग्रह करती है कि वे बाहर जाएं और स्वयं जांच करवाएं अगर उन्हें लगता है कि उन्हें कोई समस्या है। 

ताहिरा और आयुष्मान के दो बच्चे हैं- बेटा विराजवीर (सात) और वरुष्का (चार) जो अपनी मां की स्थिति से वाकिफ हैं। वे इसके बारे में जानते हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि कैंसर क्या है। ताहिरा ने कहा मैंने उन्हें यह नहीं बताया कि मैं कुछ छुट्टी के लिए जा रही  हूँ बल्कि  मैंने उन्हें बताया कि मैं अस्पताल जा रही हूं, कुछ परेशानी है और मैं वापस आ जाऊँगी। आखिरी दिन, मैंने उन्हें अस्पताल में बुलाया और उनके साथ खेली।

ताहिरा ने अपने पति आयुष्मान के संदर्भ में कहा कि वह कभी भूल नहीं सकती कि कैसे उनके  पति ने पूरी स्थिति को संभाला और कैसे इस पूरे समय के दौरान वह उनकी सबसे बड़ी ताकत बने रहे ।उन्होंने बताया कैसे वह दिन में एक सच्चे पेशेवर की तरह अपने सभी साक्षात्कार देते थे  और रात में वह अस्पताल उन्हें देखने आते थे. इस बात को बताते हुये उन्होंने कहा मुझे उन पर बहुत गर्व है.

उन्होंने बताया कि उन्होंने कैंसर को इतना महत्व नहीं दिया है कि यह उनके जीवन पर गलत प्रभाव डाले , लेकिन इतना महत्व ज़रूर दिया कि यह एक सही तरीके से जागरूकता पैदा करें।

जो हो मन में विश्वास तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी छोटी नज़र आती है।
असहाय होकर नहीं, बहादुरी तो निडर होकर ही नज़र आती है। 

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