असिया बीबी: पाकिस्तानी ईसाई महिला ने नई किताब में अपनी चुप्पी तोड़ी।

प्रेरणा महरोत्रा गुप्ता द्वारा लिखित,आनंद प्रकाश की जानकारी पर आधारित

असिया बीबी, एक पाकिस्तानी ईसाई महिला, जिसने ईश निंदा के दोषी होने के बाद, मौत की सजा पर वर्षों बिताए,उन्होंने अपने अनुभवों और अपने नए जीवन के बारे में एक पुस्तक प्रकाशित की है।

सुश्री बीबी ने फ्रांसीसी पत्रकार ऐनी-इसाबेल टॉलेट के साथ लिखा एक संस्मरण।

उन्हें 2010 में पाकिस्तान की अदालत द्वारा ईश निंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी लेकिन 2018 में बरी कर दिया गया था और वह वर्तमान में कनाडा में एक अज्ञात स्थान पर रहती है।

47 वर्षीय सुश्री बीबी ने हमेशा एक बेहद संवेदनशील मामले में अपनी बेगुनाही को बरकरार रखा, लेकिन उनके गृह देश पाकिस्तान ने इसका ध्रुवीकरण कर दिया,परन्तु दुनिया भर में उनका अनुसरण किया गया।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2018 में उसकी सजा को रद्द कर दिया, जिसके कारण धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन किए गए , जबकि समाज के अधिक उदार वर्गों ने उनकी रिहाई का आग्रह किया।

नई किताब में, उन्होंने अपनी गिरफ्तारी, अपने जेल बंदी की शर्तों और उनकी अंतिम रिहाई का वर्णन किया है। कनाडा के अपने नए जीवन की चुनौतियों पर भी चर्चा की है।

बीबी ने किताब की प्रचार सामग्री में लिखा “आप मीडिया के माध्यम से मेरी कहानी जान सकते हैं, हो सकता है कि आपने मेरी पीड़ा को समझने के लिए खुद को मेरी जगह पर रखने की कोशिश की हो,” । “लेकिन आप जेल में मेरे दैनिक जीवन या मेरे नए जीवन को समझने से बहुत दूर हैं और इसीलिए, इस पुस्तक में, मैं यह सब समझाऊँगी।”

प्रकाशन गृह द्वारा जारी एक अंश में, वह लिखती है: “मैं 50 वर्षों में ये कभी नहीं सोच सकती थी कि मैं एक धार्मिक अतिवाद के खिलाफ लड़ाई का वैश्विक प्रतीक बन जाउंगी जबकि मैं एक साधारण, अनपढ़ किसान हूं?

“बिना खिड़की के छोटे से छेद द्वारा देखती और सोचती कि पाकिस्तान मुझे क्यों निशाना बना रहा है?”

समाचार एजेंसी एएफपी द्वारा प्रकाशित न्यूज़ के अनुसार, वह अपनी जेल की परिस्थिति का वर्णन करती है, जहां उनकी गर्दन “लोहे के कॉलर में घिरी हुई थी, जो कि एक विशाल नट के साथ कसी जा सकती थी”।उन्होंने बताया कि कुछ अन्य कैदियों ने उन्हें सहानुभूति दिखाई।

इस साल के अंत में एक अंग्रेजी संस्करण के साथ इस पुस्तक को Éditions du Rocher ने बुधवार को फ्रेंच में प्रकाशित किया था।

सुश्री बीबी ने पुस्तक में सुश्री टोललेट के साथ सहयोग किया, जिन्होंने पाकिस्तान में पत्रकार के रूप में काम करते हुए वर्षों बिताए और इस विषय पर दो किताबें प्रकाशित की हैं।

आखिर बीबी पर आरोप क्यों लगाया गया था?

सुश्री बीबी जून 2009 में महिलाओं के एक समूह के साथ तकरार होने पर, उनके खिलाफ कोर्ट केस दाखिल किया गया था। जिनके साथ वह फल की कटाई का काम करती थी. तकरार का कारण था कि बीबी ने उस बाल्टी से पानी पी लिया था जो उन रूढ़िवादी महिलाओ के लिए ही था। ऐसा करके उन्होंने समूह में रूढ़िवादी मुस्लिम महिलाओं को नाराज किया, जिन्होंने कहा कि एक ईसाई के रूप में, उसने पानी को दूषित कर दिया था।

अभियोजकों ने उनपर यह भी आरोप लगाया था कि सुश्री बीबी ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की जिसके लिए उसे उसके घर पर पीटा गया और उसके हमलावरों ने दावा किया कि उसने ईशनिंदा करना कबूल कर लिया है । पुलिस जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

सुश्री बीबी की दलीलों को स्वीकार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उनको बरी कर दिया और कहा कि यह मामला अविश्वसनीय सबूतों पर आधारित था और एक भीड़ के सामने उसका कबूलनामा कराया गया था और “उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

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