मैं बड़भागी — लेखिका शैली

शैली कालरा की कविता

मिली मुझे जागीर
संस्कारों की, आस्था की
विश्वास की
माँ पापा से …
मैं बड़भागी।

हसरतों की पिटारी
खुली सोच
आसमानों को
छूती आशाएँ
धरती पर टिके पाँव
मेरी विरासत
मैं बड़भागी।

हसरतें परिंदो सी
उड़ती हैं आसमानों में
पर फैलायें
ऊँचे और ऊँचे
बेक़रार छूने को चाँद तारे
मैं बड़भागी।

ये जागीर
हसरतों की,चाहतों की
कल्पनाओं की
निष्ठा और भावनाओं की
मैं बड़भागी।

कविता का रूप लिए
घूमती हैं इर्द गिर्द मेरे
ये मेरी जागीर
मिली मुझे माँ पापा से
मैं बड़भागी।

लेखिका शैली कालरा

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