हमसे किसी ने पूछ लिया — लेखिका शैली

शैली कालरा की कविता

हमसे किसी ने पूछ लिया
जनाब बड़े खोये खोये से रहते हो
रोमैंटिक से हट कर
कहाँ गम्भीर
कवितायें लिखते हो।

क्या कहते
हमारे मित्र ……
यक़ीन नहीं कर पाते

सच ये है की
रोमैंटिक का दौर
बहुत पहले
हमें छूकर गुज़र चुका

वो दिन थे
जब हम थे आठ वर्ष के
बताना आता था नहीं
समझने कि उम्र
अभी दराज़ थी

लिख दिया करते यूँही
यूँही दौड़ लिया करते
पापा के पास

पूछते बड़े प्यार से
पापा मुहब्बत का अर्थ
तो बात दो

लिखते कैसे हैं
वो भी बता दो।
थोड़ा मुस्कुराकर
थोड़ा असमंजस
से देखते
मूजको पापा

कहते …
क्या करेगी
तू अभी जानकर
पूरी उम्र है बाक़ी
तू बस अभी
इतना जानले

इतने बड़े बड़े शब्दों
में क्यू करती तू
टाइम वेस्ट्
अभी वक़्त है
गुड़ियों से खेल ले।

रोमैंटिक कविताओं
का दौर मेरा
कब का
गुज़र चुका

अब आलम ये है
हक़ीक़त में हम
और हमारी
कवितायें जीती हैं।

लेखिका शैली कालरा

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