एक दूजे को समझो। — लेखिका प्रेरणा

प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता की कविता
दूसरे की परिस्थिति को समझो,
वो तुम्हारी समझ जायेगा।
एक दूजे का हाथ थामे,
हर इंसान ही फिर अपने लक्ष्य तक पहुँच जायेगा।
अपनी बात रखो,
फिर दूजा भी अपनी बात बतायेगा।
एक दूजे संग नाता जोड़,
फिर कोई किसी से नहीं टकरायेगा।
खुदको रखकर खुश,
दूसरों के संग भी मुस्कुराओ।
ऐसा कर धीरे-धीरे,
सबको तुम अपना बनाओ।
अपनों संग ख़ुशी भी बाँटना,दर्द भी बाँटना,
बिन बात पर गुस्सा कर,
बस एक दूसरे को बात-बात पर मत डाँटना।
लेखिका

प्रेरणा मेहरोत्रा ​​गुप्ता

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