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क्षत विक्षत आत्माएँ-जीवित भी,मृत भी

आनंद प्रकाश द्वारा लिखित यौन दरिंदे, हैवानियत, जली अधजली लाशें और क्षत विक्षत आत्माएँ-जीवित भी, मृत भी….यौन  पीड़िता कर रहीं  पल पल  यही  गुहार।जैसे भी हो 

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